भुजंगासन कैसे करे-bhujangaasan kaise kare
भुजंगासन- योग आसन में भुजंगासन का बहुत महत्व है क्योकि यह शरीर के सभी भागो के लिए फायदेमंद है इसकी आकृति कोबरा सांप की तरहा होती है इसलिए इसे कोबरा पोज भी कहते है इसका महत्व शरीर के लिए बहुत अधिक है लेकिन इसकी क्रिया को बहुत सावधानी से करना चाहिए चलिए इसकी करिये के बारे में जानते है
क्रियाविधि
- इसके लिए पहले योग मेट या दरी पर छाती के बल लेटते है
- पैरों के पंजो को जमीन से लगाकर पैरों को आपस में मिला लेते है
- अब अपने दोनों हाथो की हथेलीको कंधो के बराबर रखते है
- अब साँस को गहरी अंदर लेते हुए हाथो के सहारे से सर और छाती को नाभि तक उठाते है
- ध्यान रहे कमर पर खिचाव सहनसीलता के अनुसार ही बनाय रखे
- इस Position में धीरे-धीरे श्वास की प्रक्रिया को ले और छोड़े
- अब धीरे-धीरे वापस आते हुआ प्रारम्भिक अवस्था ग्रहण करे
- इस क्रिया को 3-4 बार करे
सावधानी
- गर्भवती महिला को इस आसन को नहीं करना चाहिए
- सर व् छाती को उठाते समय पैरों को न उठाये
- आसन को धीरे-धीरे करना चाहिए
- इस आसन से पहले हलासन करना फायदेमंद होता है
- कमर में ज्यादा दर्द होने पर हमे भुजंगासन नहीं करना चाहिए
- अगर भुजंगासन की क्रिया के दौरान कमर में हल्का दर्द महसूस हो तो अपने दोनों पैरों के बिच थोड़े दुरी बना लेनी चाहिए
- इससे पैट की मासपेशी में भी खिचाव होता है
प्रभाव/लाभ
- पाचन शक्ति को बढ़ाता है- गैस को दूर करता है कब्ज हटाता है पैट की मासपेशी को स्वस्थ बनाता है
- शुगर के मरीजों के लिये भुजंगासन फायदेमंद होता है यह पैंक्रियाज को सक्रिय बनाता है
- यह रीढ़ की हड्डी के दर्द को कम करके हड्डी को लचीली बनाता है
- यह छाती , गर्दन , तथा सिर को मजबूत बनाकर शरीर को सुडोल बनाता है
- यह अस्थमा रोगियों के लिए भी लाभकारी है यह श्वसन क्रिया को भी सुधारता है यह फेफड़ो को भी मजबूत बनाता है
- पेट पे खिचाव के कारण यह पेट की चर्बी को भी कम करती है
0 टिप्पणियाँ:
एक टिप्पणी भेजें
If you have any doubts please let me know