शवासन कैसे करे- Shavaasan kaise kare
शवासन कैसे करे- shavaasan kaise kare- शवासन जिसे मोत का आसन भी कहा जाता है यह आसन ध्यान व मन की शांति के लिए बहुत लाभदायक होता है यह हमारे आंतरिक व बाहरी अंगो को आराम प्रदान करते है यह शरीर की क्रियाओ को भी नियंत्रित करता है यह मानसिक रूप से हमे शांति व समृद्धि प्रदान है
क्रियाविधि
- सबसे पहले योग मेट मे पीठ के बल लेटते है
- सिर , कमर और पेर बिलकुल सीधे होने चाहिए
- पेरो के बिच थोड़ी जगह होनी चाहिए
- हाथो को भी शरीर से दूर करके हथेली को ऊपर की और रखना चाहिए
- शरीर के सभी अंगो की ढीला छोड़ना चाहिए
- अपनी आखो को बन्द करके गहरे-गहरे सांस ले.
- अपना ध्यान सांस की क्रिया पर केंद्रित करके शरीर को आंतरिक रूप से शांति प्रदान करनी चाहिए
- अपना ध्यान इसी अवस्था में कुछ मिनट के लिये रखना चाहिए
सावधानी
- शवासन केवल शांत व स्वस्छ स्थान पर करना चाहिए
- योग मेट या उचित चादर का प्रयोग करे
- हल्का महसूस न होने पर अपने सिर को हल्का तिरछा करले
- शरीर को किसी भी तरह का तनाव न महसूस करने दे
- आखो को बंद करके अपना ध्यान केवल श्वसन की क्रिया पर रखने दिमाग को भी फ्री रखे किसी भी प्रकार के विचार दिमाग में न लाये
- कमर में दर्द महसूस होने पर पैरो के बिच में थोड़ी जगह कर ले
- सिर को हल्का तिरझा करले
- हाथो की हथेली को खुली करके रखे साथ ही शरीर को शांत व आरामात्मक स्थिति में रखे
लाभ
- यह आसन मुख्य रूप से शरीर व मन को शांति प्रदान करता है
- यह आसन मुख्य रूप से उच्च व निम्न रक्तचाप ( High & Low Blood Pressure) जैसी बीमारी के लिए भी लाभकारी है
- शवासन किसी भी प्रकार की मानसिक, शारीरिक थकावट को भी दूर करके चुस्ती-फुर्ती प्रदान करता है
- यह आसन हमे positive सोच प्रदान करता है
- यह आसन लम्बे व्यायाम के बाद शरीर की सभी थकावट को भी दूर करता है और मासपेशी को भी आराम प्रदान करता है
- इस आसन के लगातार प्रयोग से गुस्सा, ईष्या , चीड़-चिड़ापन आदि पर भी काबू पाया जा सकता है
शवासन आज के युग के लिए बहुत जरूरी है क्योकि अब व्यक्ति काम को pressure में करता है जिसके कारण बहुत से लोग गुस्सा, ईष्या , चीड़-चिड़ापनआदि के शिकार है साथ ही साथ यह शरीर की भी थकावट को दूर करता है को इसका प्रयोग करना चाहिए शवासन ध्यानात्मक आसन का एक बहुत मह्त्वपूर्ण आसन है
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